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सोमवती अमावस्या के शुभ संयोग और दान के मुहूर्त

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By jeenmediaa


 

Hariyali amavasya 2023 date : इस बार हरियाली/सोमवती अमावस्या 17 जुलाई 2023, दिन सोमवार को मनाई जा रही है। बता दें कि आज श्रावण अमावस्या, दर्श अमावस्या, हरियाली अमावस्या, सोमवती अमावस, द्वितीय श्रावण सोमवार व्रत मनाया जा रहा है। आइए जानते हैं आज के शुभ संयोग और मुहूर्त- 

 

हरियाली अमावस्या पर शुभ संयोग और दान के शुभ मुहूर्त-

 

इस बार श्रावण कृष्ण अमावस्या तिथि का प्रारंभ- 16 जुलाई, रविवार को 10.08 पी एम से शुरू होकर इसका समापन मंगलवार, 18 जुलाई को 12.01 ए एम पर होगा। 
 

उदयातिथि के अनुसार श्रावणी, सोमवती, हरियाली अमावस्या 17 जुलाई 2023, दिन सोमवार को मनाई जा रही है।

 

शुभ संयोग दान के शुभ मुहूर्त : हिंदू कैलेंडर के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन पुनर्वसु नक्षत्र का संयोग बन रहा है, जो कि 18 जुलाई को सुबह 05.11 मिनट तक रहेगा। साथ ही सर्वार्थ सिद्धि योग का निर्माण भी होगा, जो कि 18 जुलाई की सुबह 05.11 से 05:35 तक जारी रहेगा। इसके साथ ही हर्षण योग का भी बनेगा जो सुबह 08.58 मिनट से शुरू होगा।

 

बता दें कि पुनर्वसु नक्षत्र 18 जुलाई को सुबह 05:11 तक रहेगा और सर्वार्थ सिद्धि योग 18 जुलाई सुबह 05:11 से सुबह 05:35 तक रहेगा। इसके साथ हर्षण योग का भी निर्माण हो रहा है जो सुबह 08:58 से शुरू होगा। सोमवती अमावस्या के दिन स्नान और दान के लिए दो विशेष शुभ मुहूर्त बन रहे हैं। जिसमें स्नान-दान का पहला शुभ मुहूर्त प्रातःकाल 5.34 मिनट से सुबह 7.17 मिनट रहेगा। तथा दूसरा स्नान-दान का शुभ मुहूर्त सुबह 9.01 मिनट से 10.44 मिनट तक रहेगा। 

 

अभिजित मुहूर्त- 12:00 पी एम से 12:55 पी एम

विजय मुहूर्त : दोपहर 02.56 से 03.49 तक।

गोधूलि मुहूर्त : शाम 07.18 से 07.40 तक।

 

सनातन धर्म में प्राचीन समय से ही नदी स्नान और दान देने की परंपरा चली आ रही है। अत: सोमवती अमावस्या के दिन इन शुभ संयोग में अपने सामर्थ्य के अनुसार जरूरतमंद, गरीब, असहाय व्यक्ति या ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देने तथा कुंडली में चंद्र दोष हो तो चांदी, दही, चावल, खीर तथा सफेद वस्त्र का दान करने का विशेष महत्व है।

आज अमावस्या के शुभ मुहूर्त में गौ माता को दही और चावल खिलाएं। इससे जीवन के समस्त कष्ट दूर होकर सुख-सौभाग्य में लाभ मिलता है। इस अमावस्या पर पितरों की शांति, पिंडदान, नदी स्नान तथा दान-पुण्य के कार्य और पीपल वृक्ष का पूजन, तथा पेड़-पौधों का रोपण करने का भी विशेष महत्व है।

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