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सिंधिया के गढ़ में हुंकार भरेंगी प्रियंका गांधी, ग्वालियर-चंबल में कांग्रेस के चुनावी अभियान का होगा शंखनाद

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By jeenmediaa


भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस प्रियंका गांधी का चेहरा आगे कर अब अक्रामक तरीके से चुनाव प्रचार में जुट गई है। पिछले दिनों जबलपुर से कांग्रेस के चुनावी अभियान का आगाज करने वाली कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी शुक्रवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया के गढ़ में हुंकार भरेगी। ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद यह पहला मौका है जब गांधी परिवार को कोई सदस्य ग्वालियर आ रहा है।

ग्वालियर के मेला ग्राउंड में आम सभा को संबोधित करने से पहले प्रियंका गांधी वीरांगना झांसी की रानी लक्ष्मीबाई की समाधि स्थल पड़ाव पहुंचकर वहां उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगी। ग्वालियर में प्रियंका गांधी की सभा को सफल बनाने की पूरी जिम्मेदारी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने हाथों में संभाल ली। इसके साथ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह भी लगातार बैठकों के जरिए सभा को सफल बननाने में जुटे है।  

ग्वालियर-चंबल पर कांग्रेस फोकस क्यों?-मध्यप्रदेश की राजनीति में ग्वालियर-चंबल अंचल की किंगमेकर की भूमिका होती है। प्रदेश के सियासी इतिहास को देखा जाए तो भाजपा और कांग्रेस जो भी ग्वालियर चंबल अंचल में जीतती है उसकी ही प्रदेश सरकार बनती है। 2018 के विधानसभा चुनाव में ग्वालियर-चंबल की 34 विधानसभा सीटों में से कांग्रेस ने 26 सीटों पर जीत हासिल कर सत्ता में काबिज हुई थी।

2018 के विधानसभा चुनाव में मुरैना जिले की सभी छह सीटें कांग्रेस के खाते में गई थी वहीं भिंड जिले की पांच में से तीन सीटें कांग्रेस ने जीती थी। वहीं ग्वालियर की छह विधानसभा सीटों में से पांच सीट कांग्रेस ने हथिया ली थी। वहीं शिवपुरी की पांच में से तीन सीटों पर कांग्रेस ने जीत हासिल की थी।

दलित वोटर्स पर कांग्रेस की नजर-ग्वालियर-चंबल में कांग्रेस की नजर दलित वोटर्स पर टिक गई है। ग्वालियर-चंबल की 34 विधानसभा सीटों में से 7 सीटें अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है और 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने 5 सीटों पर जीत हासिल की थी।  भिंड विधानसभा सीट पर बसपा के संजीव सिंह ने जीत कर भाजपा और कांग्रेस दोनों को पटखनी दे दी थी। पांच साल बाद अंचल में बसपा की कमजोर हालत के चलते कांग्रेस ने इस बड़े वोट बैंकं को अपने साथ ले जाना चाहती है।
 
सिंधिया को घेरने की रणनीति-कांग्रेस प्रियंका गांधी के सहारे ज्योतिरादित्य सिंधिया को उनके गढ़ में ही घेरना चाहती है। रानी लक्ष्मी बाई की समाधि पर प्रियंका गांधी के जाने का कार्यक्रम कांग्रेस की इस रणनीति का हिस्सा है। दरअसल 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद सत्ता में आई कांग्रेस को 2020 में सिंधिया के अपने समर्थक विधायकों के साथ भाजपा में जाने के बाद सत्ता से बेदखल होना पड़ा था। वहीं अब 2023 के विधानसभा चुनाव के लिए कांग्रेस अपने इस मजबूत गढ़ पर पूरा फोकस किए हुए है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ लगातार ग्वालियर-चंबल का दौरा कर रहे है।
 


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